दुसरो को रोशनी देने के लिए खुद जलना पड़ता है
पथ पे ठोकर खाकर संभलना पड़ता है
यूंही मंजिल नहीं मिलती राही को
हर कदम पे कांटों से उलझना पड़ता है।
पथ पे ठोकर खाकर संभलना पड़ता है
यूंही मंजिल नहीं मिलती राही को
हर कदम पे कांटों से उलझना पड़ता है।
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